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बेपर्दा हो गई कांग्रेस,कोई फैसला नहीं ले कर अपनी जगहंसाई करा गए राहुल गांधी

Rajkumar Aggarwal


बेपर्दा हो गई कांग्रेस,कोई फैसला नहीं ले कर अपनी जगहंसाई करा गए राहुल गांधी
-राजकुमार अग्रवाल -
कैथल (हरियाणा )।क्या यह सही है कि हरियाणा कांग्रेस कांग्रेस कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक बुलाकर राहुल गांधी ने कांग्रेसी वर्करों में उम्मीद जगाई थी?हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे विवादों, खेमेबाजी और खस्ताहाली के दौर के खात्मे के लिए राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई बैठक पूरी तरह से फिजूल साबित हुई है।राहुल गांधी द्वारा कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक बुलाए जाने के कारण हर कांग्रेसी नेता और वर्कर को यह उम्मीद जगी थी कि बैठक में राहुल गांधी बड़े और कड़े फैसले लेंगे जिसके चलते कांग्रेस के हालात सुधरेंगे और वह आगामी विधानसभा चुनाव में पूरी मजबूती के साथ भाजपा को टक्कर देने का काम करेगी। लेकिन कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई।


दुर्गति के दौर से गुजर रही हरियाणा कांग्रेस के हालात को सुधारने में राहुल गांधी नाकाम हो गए हैं और उन्होंने इस मामले में हाथ खड़े कर दिए हैं।बैठक में मौजूद एक नेता ने बताया कि प्रदेश कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में आज राहुल गांधी ने कोई भी फैसला लेने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि वे अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके हैं इसलिए वे इस मामले में कोई भी फैसला नहीं कर सकते हैं और आने वाला राष्ट्रीय अध्यक्ष ही इस मामले में कोई फैसला लेगा।राहुल गांधी के आवास पर आयोजित प्रदेश कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में कुलदीप बिश्नोई, किरण चौधरी, रणदीप सुरजेवाला और नवीन जिंदल विदेश में होने के कारण नहीं पहुंचे।बाकी नेताओं के साथ राहुल गांधी ने प्रदेश के सियासी हालात पर चर्चा की। उन्होंने अलग से भी नेताओं को बुलाकर एक एक करके जानकारी हासिल की। सबसे बातचीत करने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के हालात से दुखी हैं और लोकसभा चुनाव के परिणाम से सबको सबक लेना चाहिए।



 उन्होंने कहा कि विधानसभा के चुनाव सिर पर हैं, अब आप सभी को तय करना है कि आपस में लड़ते हुए पार्टी को खत्म करना है या मिलजुलकर चुनाव लड़ते हुए पार्टी को सत्ता की दहलीज पर पहुंचाना है।राहुल गांधी ने कहा कि वे अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इसलिए वे नेतृत्व परिवर्तन के मामले में कोई फैसला नहीं कर पाएंगे। नेतृत्व परिवर्तन का फैसला नया अध्यक्ष ही करेगा।राहुल गांधी के साथ इस बैठक पर सभी की नजर टिकी हुई थी लेकिन इस बैठक का परिणाम अनुमान के अनुसार ढाक के तीन पात ही निकला।हुड्डा समर्थक यह उम्मीद कर रहे थे कि राहुल गांधी इस बैठक में नेतृत्व परिवर्तन की बात पर सहमति जता देंगे और उनके खेमे के नेता को प्रदेश के कमान सौंप देंगे लेकिन राहुल गांधी ने मामले को हल करने की वजह अपने हाथ खड़े कर दिए।इसके चलते हरियाणा कांग्रेस के हालात में कोई सुधार चुनाव से पहले होने की उम्मीद खत्म हो गई है और वर्तमान नेतृत्व और खेमेबाजी के बीच ही कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में उतरने को मजबूर होना पड़ेगा। बात यह है कि राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई बैठक कांग्रेस के लिए बेहद मायने रखती थी।


 अगर राहुल गांधी इस बैठक में बोल्ड फैसले लेकर सभी पार्टी नेताओं को विधानसभा चुनाव के लिए काम करने का रोडमैप शॉप दे तो उससे पार्टी के कैडर में बड़ा संदेश जाता और आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ भाजपा से लड़ते हुए नजर आती।अगर राहुल गांधी को इस बैठक में कोई फैसला नहीं लेना था तो उन्हें यह बैठक बुलाई बुलानी ही नहीं चाहिए थी। राहुल गांधी पहले ही पार्टी अध्यक्ष से त्यागपत्र दे चुके हैं। ऐसे में जब वे इस पद पर आगे काम नहीं करना चाहते हैं तो हरियाणा कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक बुलाने का कोई औचित्य नहीं था।राहुल गांधी से यह उम्मीद की जाती है कि वह हरियाणा कांग्रेस में चल रही खेमेबाजी का इलाज करते हुए सारे नेताओं को एकता के सूत्र में बांधकर पार्टी को मजबूत करेंगे। 


लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश में निकाली गई एकता यात्रा के बाद इसकी संभावना बढ़ी थी कि राहुल गांधी जल्दी ही बड़े फैसले लेकर हरियाणा में पार्टी के हालात को सुधारने का काम करेंगे।कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक बुलाए जाने के बाद यह आसार बने थे कि राहुल गांधी इस बैठक में स्पष्ट नीति और नीति अपनाकर पार्टी नेताओं को एक लाइन में काम करने के लिए आदेश देंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।इस बैठक से एक बार साबित हो गया कि राहुल गांधी एक कमजोर नेता है और वे बोल्ड फैसले लेने में नाकाम हैं।हरियाणा कांग्रेस को लेकर बुलाई गई बैठक पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई है। इस बैठक से कांग्रेस और भी बेपर्दा हो गई है और यह साफ हो गया है कि कांग्रेस के मर्ज का फिलहाल किसी के पास कोई इलाज नहीं है और आपसी मारामारी के बीच कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने होंगे जिसमें वर्तमान हालात के चलते लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी उसे दुर्गति भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।

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