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लोकसभा चुनाव का खूब मजा दो महीने कटेंगे लोगों के चुनावी रंगत में दिन

बहुकोणीय मुकाबले में मतदाता लेंगे

कैथल --राजकुमार अग्रवाल - हरियाणा में अब तक प्रमुख पाटियों में नहीं बन पाया गठबंधन देश के सियासी महाभारत के लिए दुंदभी बज गई है। हरियाणा में इस दफा मतदान 12 मई को होगा। लिहाजा प्रदेश की जनता चुनाव का खूब मजा लूटेगी। स्वाद यह भी रहेगा कि गेहूं की कटाई का काम पहले ही आसानी से पूरा हो जाएगा। लिहाजा किसान उम्मीदवारों की गाडिय़ों में खूब घूमेंगे। तब तक कामकाज की चिंता दूर हो जाएगी। गाडिय़ां में बिठाने वालों की इस बार किसी तरह की कोई कमी रहने वाली नहीं है। कारण है कि इस बार हरियाणा में चुनाव की तस्वीर बहुकोणीय बनी हुई है। लोकसभा चुनाव में नए दल भी ताल ठोक रहे हैं। ऐसे में कई दल चुनाव में उतरने से प्रचारक भी बांटे-बांटे सर आएंगे। अभी तक हरियाणा में प्रमुख दलों का गठबंधन सिरे नहीं चढ़ा है। कारण है कि मौजूदा सत्तारुढ़ पार्टी भाजपा पूरे कांफिडेंस में है कि लोकसभा चुनाव में अकेले दम पर जीत लेंगे। प्रदेश की पांच नगर निगम में हुए मेयर चुनाव और जींद उप चुनाव में मिली जीत से पार्टी के आत्म विश्वास के खूब पंख लग रहे हैं। हालांकि इनेलो लोकसभा में भाजपा से गठबंधन चाहती है। इनेलो की स्थिति जजपा के अलग होने से पहले से कमजोर हो गई है। इनेलो को दोहरा झटका लगा है। हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला ने नई पार्टी बना ली है तो बसपा गठबंधन को छोड़ गई है। यही कारण है कि इनेलो भाजपा के साथ गठबंधन करना चाहती है। अभी भाजपा ज्यादा इनेलो को तरजीह नहीं दे रही है। हालांकि इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा नई दिल्ली में हरियाणा भवन में मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अतीत की सियासत और नतीजों के बारे में अवगत करा चुके हैं। बताया यह जा रहा है कि अरोड़ा ने बताया कि चुनाव रेत के मकान की तरह होता है, पता नहीं लगता कब, क्या हो जाए? 15 मिनट की बैठक में अरोड़ा ने बताया कि बरस 2004 के यमुनानगर उप चुनाव में इनेलो 16 हजार के करीब से जीत हासिल की थी, लेकिन कुछ महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में इनेलो को 16 हजार वोट भी नहीं मिले थे। खैर, अब यह देखना होगा कि दोनों दलों का गठबंधन सिरे चढ़ेगा या नहीं। दरअसल भाजपा के लिए सिरसा, हिसार और रोहतक सीट जीतना इतना आसान नहीं है। इनेलो इन्हीं सीटों को गठबंधन में मांग रही है। जहां बात कांग्रेस की है तो यह पार्टी सभी दस सीटों पर चुनाव एकेले दम पर लड़ेगी। जींद उप चुनाव के नतीजों से पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा है। हालांकि पार्टी पूरे प्रयास करेगी कि बड़े चेहरे उतारकर कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरे और ज्यादा सीट जीते। कांग्रेस की नजरें रोहतक, हिसार, सिरसा सीट पर ज्यादा निगाहें रहेगी। रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा, हिसार से कुलदीप बिश्रोई और सिरसा से प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर संभावित उम्मीदवार बताए जा रहे हैं। तीनों मुख्यमंत्री पद के चेहरे हैं। तीनों लोकसभा सीटों के नतीजे काफी मायने वाले हैं। इस बार जजपा भी चुनाव मैदान में उतर रही है। जींद उप चुनाव में जजपा उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला ने भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दी थी। कांग्रेस उम्मीदवार रणदीप सिंह सुरजेवाला तो बड़ी मुश्किल से जमानत बचा पाए थे। ऐसे में जजपा को भी मैदान में गंभीरता से लिया जा रहा है। जजपा नेता दुष्यंत चौटाला इस समय हिसार से सांसद हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वे हिसार से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। चुनाव के नतीजों पर उनकी पार्टी का भविष्य तय होगा। लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। जजपा और आप के गठबंधन की बात चली थी, लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाई है। जजपा हरियाणा में आप को दो लोकसभा सीट ज्यादा सीट नहीं देना चाह रही है।इसके बदले में भी दिल्ली की एक लोकसभा सीट भी मांग रही है। यही कारण है कि यह गठबंधन आगे नहीं बढ़ पाया। हालांकि अभी पूरी तरह से दोनों दलों के बीच संवाद खत्म नहीं हुआ है। बसपा और लोकतांत्रिक सुरक्षा पार्टी के बीच गठबंधन है। बसपा हरियाणा मेंं आठ और लोसपा दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पिछड़े वर्ग पर लोसपा के नेता सांसद राजकुमार सैनी काफी प्रभाव है। उधर बसपा से समझौता होने से एससी और बीसी वर्ग के वोट को लामबंध करने का प्रयास किया जाएगा। खैर, अब देखना है कि आने वाले दिनों में हरियाणा की सियासत किस तरफ जाएगी

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