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पढ़े क्या था ---पत्रकार हत्या मामला जिसमे सिरसा डेरा प्रमुख सहित 4 को कोर्ट ने दोषी करार दिया गया



पत्रकार हत्या मामले में राम रहीम समेत 4 दोषी करार,17 को सुनाई जाएगी सजा
अक्टूबर 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर हुआ था हमला,एक महीने बाद हुई मौत 
जिस रिवॉल्वर से गोलियां चलाई थीं,लाइसेंस डेरा के मैनेजर कृष्ण लाल के नाम पर
साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहा राम रहीम
चंडीगढ़ (अटल हिन्द न्यूज )
atalhind@gmail.com   9416111503
पंचकूला- सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम समेत चार को दोषी करार दिया। 17 जनवरी को चारों को सजा सुनाई जाएगी। 2 जनवरी को सीबीआई कोर्ट ने 16 साल पुराने इस मामले के आरोपी गुरमीत राम रहीम, निर्मल,कुलदीप और कृष्ण लाल को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे। फैसला जज जगदीप सिंह ने सुनाया। उन्होंने ही साध्वी यौन शोषण मामले में राम रहीम को सजा सुनाई थी। जज जगदीप सिंह ने करीब तीन बजे अपना फैसला सुनाया। अदालत सजा पर फैसला 17 जनवरी को सुनाएगी। गुरमीत अभी साध्वी दुष्कर्म मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 कैद की सजा काट रहा है। गुरमीत के साथ कृष्ण लाल,कुलदीप और निर्मल सिंह को दोषी करार दिया गया है। मामले में फैसला सुनाए जाने से पहले कृष्ण लाल, कुलदीप और निर्मल सिंह को अदालत में पेश किया गया। गुरमीत राम रहीम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनारिया जेल से ही पेश हुआ। बता दें कि 16 साल बाद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में यह फैसला आया है। 2002 से मामले की कोर्ट मे सुनवाई चल रही थी और अब छत्रपति के परिजनों का लम्बा इंतजार खत्म हो गया है।




पूरा मामला-

2002 में साध्वी यौन शोषण मामले में एक पत्र सामने आया था, जिसमें साध्वियों ने अपने साथ हो रहे यौन शोषण का खुलासा करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में मदद की गुहार लगाई थी। उन दिनों पत्रकार रामचंद्र छत्रपति अपना अखबार पूरा सच प्रकाशित करते थे। साध्वी द्वारा लिखा गया एक पत्र लोगों के बीच चर्चा का विषय बना, तो छत्रपति ने साहस दिखाया और 30 मई को अपने अखबार में 'धर्म के नाम पर किए जा रहे हैं साध्वियों के जीवन बर्बादÓ शीर्षक से खबर छाप दी।
इस खबर से हर तरफ तहलका मच गया क्योंकि अब अखबार द्वारा खुलकर लोगों को इस बात की जानकारी हुई कि डेरे में साध्वियों के साथ यौन शोषण किया जा रहा है। जिसके बाद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को लगातार राम रहीम द्वारा धमकियां भी दिए जाने लगी। इस बारे में छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति बताते हैं कि पिता लगातार मिल रही धमकियों से नहीं डरे और इस मामले को लगातार प्रकाशित करते रहे।

24 सितंबर 2002 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए सीबीआई को जांच के आदेश दिए और सीबीआई द्वारा केस की जांच शुरू की गई। लेकिन शायद गुरमीत राम रहीम को यह मंजूर नहीं था और फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। 24 अक्टूबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति अपने घर पर अकेले थे कि तभी कुलदीप और निर्मल सिंह ने उन्हें आवाज देकर घर के बाहर बुला लिया। कुलदीप ने छत्रपति पर पांच फायर किए और दोनों मौके से फरार हो गए। लेकिन पुलिस ने उसी दिन कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया था। पत्रकार छत्रपति को अस्पताल ले जाया गया था, पहले रोहतक पीजीआई में भर्ती करवाया गया था। बाद में उनकी गंभीर हालत को देखते हुए दिल्ली अपोलो में ले जाया गया था। लेकिन 28 दिनों बाद 21 नवंबर 2002 को पत्रकार रांमचंद्र छत्रपति ने दम तोड़ दिया। बाद में जांच में सामने आया कि जिस रिवॉल्वर से फायर की गई थी, वह डेरा सच्चा सौदा के मैनेजर कृष्ण लाल की लाइसेंसी रिवॉल्वर थी। इसके बाद सिरसा समेत पूरे देश में इस घटना लेकर प्रदर्शन भी हुआ। तत्कालीन चौटाला सरकार ने जांच के आदेश दिए। इस दौरान दूसरे आरोपी निर्मल सिंह ने पंजाब में सरेंडर कर दिया। पुलिस ने सिरसा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर ट्रायल शुरू करवा दिया। इस मामले में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कई सुनवाई के बाद 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने सिरसा कोर्ट के ट्रायल को रुकवा दिया और सीबीआई को जांच के आदेश दिए। सीबीआई जांच के दौरान राम रहीम ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर केस में स्टे लगवा ली। जिसके बाद मामले में एक साल तक स्टे लगा रहा।




RAMRAHIM (FILE PHOTO)
 बेटे अंशुल छत्रपति ने भी हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। जिसके बाद नवंबर 2004 में स्टे टूट गया। सीबीआई ने फिर से जांच शुरू कर दी और इस मामले में लगातार जांच चलती रही। 31 जुलाई 2007 में सीबीआई ने चार्जशीट पेश की। 2014 में कोर्ट में सबूतों को लेकर बहस शुरू हुई। 2007 में पेश किए गए चालान में खट्टा सिंह अहम गवाह थे, लेकिन वह अपने बयानों से पलट गए। अगस्त 2017 में जब साध्वी यौन शोषण मामले में गुरमीत राम रहीम को सजा हुई, तो खट्टा सिंह ने दोबारा अपनी गवाही देने के लिए अपील की और उनकी गवाही हुई। 2 जनवरी 2019 को इस मामले की आखिरकार सुनवाई पूरी हुई और कोर्ट ने राम रहीम समेत कुलदीप, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को 11 जनवरी को कोर्ट में पेश होने के लिए आदेश दिए। आज 11 जनवरी को इस मामले का फैसला आया है। इस दौरान पंचकूला के पूरे अदालत परिसर की पुलिस ने एक तरह से किलबंदी कर दी गई थी। कोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी। वरिष्ठ पुलिस अफसर भी वहां मौजूद रहे। साध्वी दुष्कर्म मामले में गुरमीत राम रहीम को जज जगदीप सिंह इने ही सजा सुनाई थी। गुरमीत सुनारिया जेल में दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 साल कैद की सजा काट रहा है। फैसले के मद्देनजर पंचकूला शहर, पंचकूला के कोर्ट परिसर, रोहतक के सुनारिया जेल परिसर और सिरसा शहर व वहां डेरा सच्चा सौदा के आसपास कड़ी सुरक्षा है। पंचकूला में कोर्ट परिसर में सीबीआइ के विशेष जज जगदीप सिंह को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट परिसर में लाया गया। मूल रूप से जींद के रहने वाले जगदीप सिंह ने ही साध्वी यौन शोषण मामले में डेरा मुखी को सजा सुनाई थी।
रामचंद्र छत्रपति ने न्याय के लिए लड़ी लंबी लड़ाई

इसके बाद उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने कोर्ट में याचिका दायर कर अपने पिता की मौत की सीबीआई जांच की मांग की थी। जनवरी 2003 में अंशुल ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सीबीआई जांच करवाने के लिए याचिका दायर की, जिस पर हाईकोर्ट ने नवंबर 2003 में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।अपने पैतृक गांव दडबी में खेती किसानी करने वाला अंशुल अपनी मां कुलवंत कौर,छोटे भाई अरिदमन और बहन क्रांति और श्रेयसी के साथ अपने पिता को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ते रहे। अंशुल ने बताया कि हमने एक ताकतवर दुश्मन के साथ इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी है। इस मामले में सीबीआइ की ओर से 46 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। बचाव पक्ष की ओर 21 गवाही पेश किए गए थे। हत्या के चश्मदीद रामचंद्र के बेटे अंशुल और अदिरमन थे। जिन्होंने कोर्ट में आंखों देखी ब्यां की थी। इसके अलावा हत्या के षड्यंत्र के बारे में गवाह खट्टा सिंह ने कोर्ट में बयान दिए थे। साथ ही डाक्टरों की भी गवाहियां हुई थी। बचाव पक्ष की दलीलें थी कि राम रहीम का पहली बार 2007 में केस में सामने आया था। साथ ही किसी भी आरोपित की पहचान नहीं हुई थी। मामले की जांच डीएसपी सतीश डागर और डीआइजी एम नारायणन ने की थी। कोर्ट मेें केस को साबित करने के लिए एडवोकेट एचपीएस वर्मा ने कोई कसर नहीं छोड़ी।





रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में अब तक का घटनाक्रम
- पत्रकार रामचंद्र छत्रपति द्वारा 'पूरा सचÓ में 30 मई 2002 को धर्म के नाम पर किया जा रहा है साध्वियों का जीवन बर्बाद समाचार प्रकाशित किया गया।
- 4, 7 और 27 जून 2002 को डेरा सच्चा सौदा से जुड़े बड़े समाचार प्रकाशित किए। 
- डेरा अनुयायियों ने पूरा सच के खिलाफ कार्रवाई करने व प्रतिबंध की रखी मांग।
- 2 जुलाई 2002 को एसपी सिरसा को डेरे की धमकियों से अवगत करवाया और सुरक्षा की मांग रखी। 
- अक्टूबर 2002 में डेरा के प्रबंधक कृष्ण लाल पूरा सच कार्यालय पहुंचे और यहां उन्होंने डेरे के विरूद्ध खबर लिखने के मामले को बंद करने को कहा। 
24 अक्टूबर 2002 को डेरा में कारपेंटर का काम करने वाले दो युवकों ने रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोली मारी। एक पकड़ लिया गया। शहर थाना में केस दर्ज। 

- 24 अक्टूबर 2002 को एसआइ ने बयान दर्ज किए, लेकिन डेरा प्रमुख का नाम नहीं लिखा।
- 29 अक्टूबर 2002 को कृष्ण लाल ने सीजेएम फिरोजपुर की कोर्ट में सरेंडर किया। 
- छत्रपति का 8 नवंबर 2002 तक क पीजीआइ रोहतक में चला इलाज। इसके बाद अपोलो भेज दिया गया। 
- 8 नवंबर 2002 को ही छत्रपति के पिता सोहन राम ने मजिस्ट्रेट से बयान करवाए जाने की दरखास्त दी। 
- 21 नवंबर को रामचंद्र छत्रपति का देहांत हो गया। 
- 5 दिसंबर 2002 को सिरसा पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में दायर की चार्जशीट, डेराप्रमुख का नाम नहीं था। 
- 2003 : अंशुल छत्रपति ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की। 
- 10 नवंबर 2003 सीबीआइ को ट्रांसफर हुआ केस। 

- 9 दिसंबर 2003 को सीबीआई ने शुरू की जांच, सीबीआई ने शहर थाना में एक केस और दर्ज किया, जिसमें डेरा प्रमुख का नाम भी शामिल किया। 
- 30 जुलाई 2007 को सीबीआई ने पेश किया चालान।

छत्रपति हत्याकांड-
13 साल के बेटे ने करवाई थी राम रहीम के खिलाफ एफआईआर
छत्रपति हत्याकांड मामले ने गुरमीत राम रहीम समेत 4 को कोर्ट ने दोषी माना है। 17 जनवरी को सभी को सजा सुनाई जाएगी। रामचंद्र का परिवार 16 साल तक कभी सिरसा कोर्ट, कभी हाईकोर्ट तो कभी सुप्रीम कोर्ट तक गया। केस में सबसे अहम किरदार रामचंद्र का बेटा अरिदनम छत्रपति था, जिसने महज 13 साल की उम्र में गुरमीत राम रहीम के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाई थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद उनका संघर्ष पूरा हुआ है।
अंशुल पापा के साथ रोहतक पीजीआई था तो अरिदमन ने करवाई थी एफआईआर
पत्रकार के बड़े बेटे अंशुल छत्रपति बताते हैं कि 24 अक्टूबर 2002 को घर के बाहर उनके पिता को गोली मार दी गई। आनन-फानन में मैं उन्हें सिरसा अस्पताल लेकर गया। हालत खराब होने के कारण उन्हें रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया गया। मैं पापा के साथ था। मुझे पता चला कि आरोपी कुलदीप को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और कुछ दिन बाद दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
इस बीच मेरी गैरमौजूदगी में मेरे छोटे भाई अरिदमन ने गुरमीत राम रहीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। तब रोहतक में इलाज चल रहा था। इसी बीच उनके पिता की हालत बिगड़ी तो उन्हें अपोलो अस्पताल, दिल्ली भेज दिया गया। कुल 28 दिन के बाद 21 नवंबर 2002 को उनकी मौत हो गई। छत्रपति की मौत के बाद प्रदेशभर में प्रदर्शन हुए।तत्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने जांच के आदेश दिए। पुलिस ने राम रहीम को कहीं भी केस में नहीं दिखाया और आनन-फानन में चार्जशीट फाइल कर सिरसा कोर्ट में चालान पेश कर दिया। सिरसा कोर्ट में ट्रायल शुरू हो गया। इसके बाद अंशुल ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई। 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए और सिरसा कोर्ट के ट्रायल को रुकवा दिया। सीबीआई जांच ही कर रही थी कि राम रहीम सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और इस पर स्टे ले आए। 1 साल तक स्टे रहा। अंशुल ने सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी और नवंबर 2004 में स्टे हट गया। सीबीआई ने फिर जांच शुरू की। लगातार जांच चलती रही। 31 जुलाई 2007 को सीबीआई ने चार्जशीट पेश की। 2014 में सबूतों पर कोर्ट में बहस शुरू हुई।अंशुल बताते हैं कि दोनों भाइयों ने आखिरी दम तक केस लडऩे की ठान रखी थी। दूसरे लोग हमारा साथ दे रहे थे, तो हमारे पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता था। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कभी हमारे रिश्तेदारों के माध्यम से तो कभी जानने वालों के माध्यम से समझौता के दबाव बनाया गया। एक बार पंजाब के एक पूर्व मंत्री ने उन्हें समझौते का ऑफर किया। तो उनके पापा के दोस्त एक सरपंच को हरियाणा के एक पूर्व सीएम ने समझौते का दबाव बनाया। लेकिन वे कभी नहीं झुके। अंशुल बताते हैं कि पापा की मौत के बाद काफी उतार चढ़ाव आए। हमने खुद का पेट काटकर अखबार काफी दिन तक चलाया। भाई-बहन और अपनी शादी की। इस बीच वे कर्जदार भी हो गए थे। आर्थिक उतार-चढ़ाव भी आए लेकिन पुस्तैनी जमीन ने बचाए रखा। तभी यह लड़ाई लड़ सके।
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राम रहीम के गुर्गों ने पत्रकार सेठी के ऑफिस में की थी तोडफ़ोड़, फिर परिवार को जलाने का प्रयास
फतेहाबाद। राम रहीम को हर वो व्यक्ति नगवार गुजरता था, जो उसके खिलाफ कुछ भी बोलता या लिखता था। गुरमीत राम रहीम के काले कारनामों को उजागर करने पर उसने जहां पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या करवा दी थी। वहीं, छत्रपति की हत्या में राम रहीम का हाथ होने के तथ्य छापने पर पत्रकार राजकुमार सेठी के ऑफिस में अपने गुर्गों से हमला कराया था और उनके परिजनों को जिंदा जलाने की कोशिश की थी। सेठी रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में सीबीआई की ओर से राम रहीम के खिलाफ गवाह हैं। पत्रकार सेठी उस वक्त को याद करके आज भी सिहर उठते हैं। उन्होंने बताया 2002 में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के बाद उन पर हमला किया था। अपने सांध्य दैनिक में उन्होंने लगातार डेरे की कारगुजारियों को उजागर किया था। उस समय राम रहीम के लोग मेरे परिवार को खत्म करने पर उतारू थे। बावजूद इसके हम छत्रपति के परिवार के साथ खड़े रहे। छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई ने सेठी को अपना महत्वपूर्ण गवाह बनाया और सेठी ने सीबीआई कोर्ट में बाबा के खिलाफ अपनी गवाही भी थी। सेठी ने बताया कि सीबीआई कोर्ट में बाबा राम रहीम से जब उनका आमना-सामना होता तो वह डरा हुआ दिखाई देता था। हत्यारा और बलात्कारी गुंडा किस्म का इंसान जब सच को अपने सामने देखता है तो डर ही जाता है।

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