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30 साल का लड़का प्रदेश की राजनीति में बहुत धमाकेदार एंट्री मार गया ,दुष्यंत ने चाचा अभय को जींद में दी मात

 30 साल का  लड़का प्रदेश की राजनीति में बहुत धमाकेदार एंट्री मार गया ,दुष्यंत ने चाचा अभय को जींद में  दी मात 


-----राजकुमार अग्रवाल ----

चंडीगढ़ । हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला ने 30 साल की उम्र में जींद की धरती पर 32 साल पुराने इतिहास को रविवार को दोहरा दिया। 32 साल पहले उनके परदादा चौधरी देवीलाल ने जींद की धरती पर ऐतिहासिक समस्त हरियाणा सम्मेलन किया था। अब 32 साल बाद उनके परपोते सांसद दुष्यंत चौटाला ने समस्त हरियाणा सम्मेलन में उसी अंदाज में अपार जुटाकर साबित कर दिया कि जनता में पैठ हो तो राजनीतिक नंबरदारी के लिए कोई जगह राजनीति में नहीं बचती है। उन्होंने रविवार को जींद में अपनी नई जननायक जनता पार्टी की लांचिंग के मौके पर आयोजित समस्त हरियाणा सम्मेलन में लोगों की उत्साही भीड़ जुटाकर खुद को जननायक चौधरी देवीलाल के असली उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित कर दिया। मंच से उन्होंने अपनी नई पार्टी का एक तरह से जो चुनावी घोषणा पत्र जनता के बीच प्रस्तुत किया,उसके जरिए वह जनता के तमाम वर्गों के लोगों को साधते हुए नजर आए।
रविवार को जींद में जननायक जनता पार्टी की लांचिंग के मौके पर आयोजित समस्त हरियाणा सम्मेलन में इतनी भारी भीड़ उमड़ी कि आयोजकों द्वारा की गई व्यवस्थाएं भीड़ के आगे दम तोड़ती नजर आई। 32 साल पहले जींद की ही धरती पर जब चौधरी देवीलाल ने अपने न्याय युद्ध की शुरूआत समस्त हरियाणा सम्मेलन से की थी, तब चौधरी देवीलाल के साथ कांग्रेस को छोड़कर बाकी तमाम राजनीतिक दलों के पूरे उत्तर भारत के बड़े नेता कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। कांग्रेस विरोधी तमाम दलों के नेताओं ने भी उनके समस्त हरियाणा सम्मेलन की कामयाबी के लिए पसीना बहाया था। चौधरी देवीलाल के परपोते सांसद दुष्यंत चौटाला ने अकेले अपने दम पर जींद की इसी धरती पर बहुत बड़ी समस्त हरियाणा सम्मेलन रैली का आयोजन कर अपने विरोधियों को दिखा दिया कि 30 साल का यह लड़का प्रदेश की राजनीति में बहुत धमाकेदार एंट्री मार गया है। दुष्यंत चौटाला को इसमें केवल अपने छोटे भाई दिग्विजय चौटाला और माता नैना चौटाला के अलावा उन समर्थकों और कार्यकर्ताओं का साथ मिला, जो कभी उनके पिता डा. अजय सिंह चौटाला और दादा ओमप्रकाश चौटाला के साथ काम करते थे। रैली के मंच से दुष्यंत चौटाला और उनके समर्थक कई नेताओं ने उन्हें अभिमन्यु बताते हुए कहा कि इस अभिमन्यु को घेरकर ढेर करने का प्रयास कुछ अपनों ने ही किया लेकिन वह सफल नहीं रहे। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि वह अभिमन्यु हैं लेकिन उन्होंने चक्रव्यूह को भेदना अपने पिता डा. अजय सिंह चौटाला और मां नैना चौटाला से सीखा है। रविवार को जींद में उनके समस्त हरियाणा स मेलन में उमड़ी भीड़ से लगातार दुष्यंत-दुष्यंत के नारे ठीक उसी तर्ज पर लग रहे थे, जिस तरह 2014 के लोकसभा चुनाव के समय मोदी-मोदी के लगते थे। रैली में उमड़ी भीड़ से यह साफ हो गया कि इनैलो का संगठन भले ही पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने विधानसभा में विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला को सौंप दिया है लेकिन जनता में पैठ सांसद दुष्यंत चौटाला की है। सफल रैली के आयोजन से सांसद दुष्यंत चौटाला ने जननायक चौधरी देवीलाल की राजनीतिक नंबरदारी पर अपने चाचा अभय सिंह चौटाला की जगह अपना दावा मजबूती से ठोंक दिया। उन्होंने रैली के मंच से कहा भी कि हरी पगड़ी चौधरी देवीलाल की थी। उसके बाद यह उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला के सिर पर आई और इस पगड़ी पर उनके बाद उनके बड़े बेटे डा. अजय सिंह चौटाला का हक है। महज 3 महीने में ही सांसद दुष्यंत चौटाला ने छोटे भाई दिग्विजय चौटाला, माता नैना चौटाला और बीच में कुछ दिन के लिए अपने पिता डा. अजय सिंह चौटाला की मदद से प्रदेश की जनता में अपनी बहुत गहरी पैठ बनाकर उसे रविवार को जींद की उस धरती पर साबित भी कर दिया, जिस धरती पर आज से 32 साल पहले चौधरी देवीलाल ने प्रदेश में न्याय युद्ध की शुरूआत कर 1987 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का काम किया था। सांसद दुष्यंत चौटाला के विरोधी भी जींद में उनकी इतनी सफल रैली से हैरान हैं। 
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बिना संगठन, बिना पार्टी के सफल रैली-
सांसद दुष्यंत चौटाला ने बिना संगठन, बिना पार्टी, बिना झंडे के रविवार को जींद में भीड़ के लिहाज से बेहद सफल रैली का आयोजन कर जनता में अपनी गहरी पैठ साबित कर दी। इस रैली के लिए सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके समर्थकों ने रात-दिन एक कर दिया और रविवार को इसका नतीजा बेहद उत्साही और भारी भीड़ के रूप में सामने था। रैली के मंच से सांसद दुष्यंत चौटाला ने शालीनता का दामन एक पल के लिए भी नहीं छोड़ा।अपने दादा पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला का नाम ही पूरे आदर से नहीं लिया बल्कि भीड़ से उनकी जिंदाबाद का नारा भी लगवाया। साथ ही राजनीतिक रूप से उनसे उचित दूरी भी यह कहकर बनाई कि ओमप्रकाश चौटाला उनके परिवार के मुखिया हैं, मगर साथ ही विरोधी राजनीतिक दल के मुखिया भी हैं। चाचा अभय सिंह चौटाला का नाम दुष्यंत से लेकर दिग्विजय और नैना चौटाला किसी की जुबान पर भी नहीं आया। उन्होंने नई पार्टी के कोष में अपने वेतन का अब तक का 27 लाख रूपया डालने का ऐलान किया तो समर्थकों से नई पार्टी के लिए नोट और एक वोट का आह्वान ठीक उसी तर्ज पर किया, जिस तरह 1986 के अपने न्याय युद्ध में चौधरी देवीलाल ने किया था। 
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तमाम वर्गों को साधने का दुष्यंत का प्रयास
सांसद दुष्यंत चौटाला ने अपनी समस्त हरियाणा स मेलन रैली के मंच से पार्टी का एक तरह से चुनावी घोषणा-पत्र रविवार को जारी कर दिया। इसमें बेरोजगारों, किसानों, व्यापारियों, सरकारी कर्मचारियों, महिलाओं, बुजुर्गों समेत तमाम वर्गों को साधने का उन्होंने प्रयास किया है। साथ ही उन्होंने 36 बिरादरी के लोगों को साथ लेकर चलने की बड़ी बात रैली के मंच से कही। इसके जरिए उन्होंने अभी तक इनैलो की एक जाति विशेष की पार्टी होने का लेबल अपनी नई पार्टी पर नहीं लगने देने का अपनी तरफ से गंभीर प्रयास किया है।

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